इंग्लैंड में स्पेस विषय पर कर रहीं पीएचडी इस बेटी ने दो माह रात नही देखी bastinews
इंग्लैंड में स्पेस विषय पर कर रहीं पीएचडी इस बेटी ने दो माह रात नही देखी
रिपोर्ट मनीष मिश्र
बस्ती। मन और लगन से किया गया हर काम सफल होता है, बस्ती की 33 वर्षीय बेटी मन और लगन से अपने सपनों को साकार कर रही है, मंजिल भी करीब है जल्द ही यह बेटी अंतरिक्ष में कदम रखेगी। कल्पना चावला को प्रेरणा मानने वाली अनुश्री को नासा ने एक अप्रैल- 2020 से प्रशिक्षण के लिए बुलावा भेजा था, लेकिन लॉकडाउन की वजह से फिलहाल प्रशिक्षण टल गया था। अनुश्री इन दिनों इंग्लैड के कालचेस्टर सिटी में रहकर माइक्रो आइट्रोलॉजी स्पेस विषय से पीएचडी कर रही हैं। यहां नासा ने उन्हें भेजा है। शहर के गांधीनगर निवासी रेलवे के अधिकारी राकेश श्रीवास्तव व सुनीता की इकलौती बेटी अनुश्री कुशाग्र बुद्धि की हैं। परिवार ने उन्हें भारतीय प्रशासनिक सेवा में जाने के लिए प्रोत्साहित किया।
कल्पना चावला की मौत ने अनुश्री को झकझोर दिया
वर्ष- 2003 में लखनऊ में तैयारी के दौरान कल्पना चावला की अंतरिक्ष अभियान से लौटते समय मौत की घटना ने अनुश्री को झकझोर दिया। इसी बीच उन्होने सिविल सर्विसेज की तैयारी के लिए ली गई साइंस की पुस्तक में मंगल ग्रह पर जीवन की तलाश के बारे में पढ़ा। इसके बाद सिविल सर्विसेज से उसका मन उचट गया और यहीं उसके मन में मंगल ग्रह अभियान में शामिल होने का बीज रोपित हो गया। परास्नातक करने के दौरान अनुश्री ने लखनऊ में बायो एक्सिस डीएनई रिसर्च सेंटर से बायो टेक्नोलॉजी में शार्ट टर्म प्रोजेक्ट का प्रशिक्षण लेकर अपने जीवन की दिशा मोड़ दी। इसी बीच इंग्लैंड की एक निजी संस्था यूनिवर्सिटी ऑफ एसेक्स ने एमएससी का ऑफर दिया, जिसे अनुश्री ने स्वीकार कर लिया
प्रशिक्षण के दौरान दो माह कभी रात नहीं देखा
– इंग्लैंड में पढ़ाई के दौरान अमेरिका की एक निजी कंपनी ने मंगल ग्रह अभियान के लिए यूटा के रेगिस्तान में प्रशिक्षण के लिए प्रस्ताव दिया। यहां भारत से अनुश्री के अलावा सात देशों के प्रशिक्षणार्थियों के साथ मंगल ग्रह के वातावरण में रहने का प्रशिक्षण दिया गया। अनुश्री बताती हैं कि प्रशिक्षण के दौरान उन्हें हैब से बाहर आने पर पंद्रह किलो का स्पेस सूट पहनकर काम कराया जाता था। दो माह नार्थ पोल यानी उत्तरी ध्रुव के करीब प्रशिक्षण दिया गया, जहां दो माह में कभी रात नहीं देखी। इंग्लैंड में मंगल ग्रह से संबंधित वैज्ञानिक प्रयोग के लिए धरती के 1.1 किमी नीचे नमक की खदान में पंद्रह दिन का प्रशिक्षण मिला।