*डी.एम. के आदेशों को पूर्ति निरीक्षक ने दिखाया ठेंगा* *कोटेदार के मनमाफिक पूर्ति निरीक्षक ने लगाई जांच आख्या रिपोर्ट, ग्रामीणों का हो रहा उत्पीड़न*
*डी.एम. के आदेशों को पूर्ति निरीक्षक ने दिखाया ठेंगा*
*कोटेदार के मनमाफिक पूर्ति निरीक्षक ने लगाई जांच आख्या रिपोर्ट, ग्रामीणों का हो रहा उत्पीड़न*
गोण्डा। एक तरफ शासन व जिला अधिकारी मार्कण्डेय शाही स्पष्ट आदेश है कि लाॅक डाउन में सभी कार्ड धारकों को अप्रैल माह से प्रति यूनिट 05 किलो राशन निशुल्क वितरण किया जाय वहीं जिला पूर्ति विभाग की मिलीभगत कहें या रहमदिली के चलते कोटेदारों द्वारा बड़ी ही चतुराई से निशुल्क बंटने वाले राशन को गरीब व कमजोर दलित वर्ग वाले कार्ड धारकों न देकर अपनी जेब भरने का कार्य जोरों से किये जाने का मामला प्रकाश में आया है। चर्चा की मानें तो पूर्ति निरीक्षक राम नरायन वर्मा के रसूख व पहुंच के चलते उन्हें नगर, पंडरीकृपाल, मुंजेहना आदि ब्लाकों का चार्ज काफी समय से मिला हुआ है जिसके चलते उनका और कोटेदारों का गंठजोड़ इस कदर चल रहा है कि उनके द्वारा कार्यवाही करना तो दूर की बात जांच करना भी मुनासिब नही समझा जाता। विकास खण्ड मुंजेहना अंतर्गत ग्राम छजवा में जानकारी लेने पर वहां मौजूद कार्ड धारक-ललिता देवी के पति चन्दन कुमार, रामदुलारी के पुत्र मुकेश, बालकराम, संदीप, श्याम बिहारी, सीतापति, राजकुमारी पत्नी सरबजीत, कुमारी कंचन आदि सहित अन्यकार्ड धारकों ने बताया कि हम लोग दलित वर्ग के भूमिहीन व्यक्ति हैं यहां का कोटेदार संगमलाल द्वारा हमेशा प्रति यूनिट पर 04 किलो राशन दिया जाता है। लाॅक डाउन के चलते सरकार द्वारा निशुल्क दिए जाने वाला राशन कोटेदार ने नही दिया है। बहुत से महिलाओं ने यह भी बताया कि हम लोगों का राशन कार्ड करीब 01 वर्ष से न होने के चलते राशन नही मिल रहा है जिसको बनवाने के नाम पर कोटेदार ने रुपए भी ले लिए हैं परंतु साल बीत रहे हैं राशन कार्ड नही मिला। ग्रामवासियों द्वारा बयान देने की जानकारी होने पर कोटेदार ने संवाददाता के मो0नं0 पर फोन करके बताया कि कोरोना पीड़ित एक महिला की मदद करने हेतु कार्ड धारकों से पूंछकर उनके हिस्से का राशन दिया गया है।मीडिया कर्मी के पास कोटेदार की काॅल रिकार्डिंग सुरक्षित है। जिसकी खबर 07 मई को प्रकाशित होने पर जिलाधिकारी मार्कण्डेय शाही द्वारा संज्ञान लेते हुए पूर्ति निरीक्षक आर एन वर्मा व पूर्ति निरीक्षक चंदन कुमार को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई। पीड़ितों का आरोप है कि दोनों पूर्ति निरीक्षकों द्वारा पीड़ितों का बयान न लेकर कोटेदार व प्रधान के घर बैठकर जांच पूर्ण कर मनमाफिक आख्या रिपोर्ट उच्चाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत की गई। मामले की जानकारी लेने पर पूर्ति निरीक्षक श्री वर्मा ने बताया कि ग्राम छजवा के अतिरिक्त 02 अन्य मजरों में जाकर कार्ड धारकों का बयान लिया गया है जबकि पूर्ति निरीक्षक चंदन कुमार ने बताया कि छजवा के अतिरिक्त 01 अन्य मजरे मे जाकर कार्ड धारकों का बयान लिया गया है जिससे दोनों पूर्ति निरीक्षक के बयानों में भिन्नता नजर आई। पुनः चन्दन कुमार से पूंछा गया कि श्री वर्मा 03 गांव में जाकर जांच करना बता रहे और आप मात्र 02 ही गाँव में जांच करना बता रहे हैं तब चन्दन कुमार ने बताया कि प्रधान के यहां बैठे थे वह कार्डधारकों को बुलाते गए और हम बयान लेते गए। यहां पुष्टि हो जाता है कि ग्राम प्रधान व कोटेदार पट्टीदार हैं इसलिए मनमाफिक कार्डधारकों का बयान दिलाकर बचाने का प्रयास किया गया जिसमें पूर्ति निरीक्षकों की भारी भूमिका नजर आती है। पूर्ति निरीक्षकों द्वारा की गई जांच संदिग्ध लगने पर दिनांक 27 जून को ग्राम छजवा पहुंचे मीडिया कर्मियों से कार्डधारकों ने बताया कि जब से आप लोगों ने निशुल्क अनाज वितरण न किए जाने की खबर प्रकाशित किया है तब से कोटेदार धमकी दे रहा है कि अब किसी से शिकायत करोगी तो राशन कार्ड से नाम कटवा दूँगा इतना ही नही प्रति यूनिट किलो राशन तो वह हमेशा ही देता रहा है अब 02 बार से सिर्फ गेंहूँ ही यह कहकर दे रहा है कि आप लोगों का चावल आया ही नही है। वहीं 02 महिलाओं ने अंत्योदय कार्ड दिखाते हुए कहा कि हम लोग गरीब व भूमिहीन हैं फिर भी हमारा अंत्योदय कॉर्ड कटवा दिया गया। वहीं दर्जनों दलित महिलाओं ने बताया कि हम लोगों का राशन कार्ड बना ही नही है जिससे हम लोग राशन नही पा रहे हैं। छजवा ग्रामवासियों के अनुसार काफी दिनों से एक ही ब्लॉक में टिके पूर्ति निरीक्षकों की कार्यशैली पर सवालिया निशान लग रहे हैं जो जांच का विषय है। इतना ही नही डीएसओ बीके महान कई बार कह चुके हैं कि पूर्ति निरीक्षक आरएन वर्मा के कार्य क्षेत्र में बदलाव कर देंगे परन्तु न जाने किस मोह पास व रहमदिलीवश बदलाव करने में असमर्थ हो जाते हैं।
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