जल और वायु इन दोनों तत्वों के बिना जीवन की कल्पना भी करना असम्भव है कृपया इन्हें प्रदूषित होने से बचायें डॉ आशीष - Sunshine samay सनशाइन समय

जल और वायु इन दोनों तत्वों के बिना जीवन की कल्पना भी करना असम्भव है कृपया इन्हें प्रदूषित होने से बचायें डॉ आशीष

 

डॉ आशीष त्रिपाठी फोटो फाइल सनशाइन समय 

इटावा कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय भारत सरकार नई दिल्ली द्वारा आयोजित स्वच्छता पखवाड़ा के अन्तर्गत जन शिक्षण संस्थान ने आज जनपद इटावा के बसरेहर विकासखंड के लोहिया बहादुरपुर ग्राम में जल प्रबंधन कार्यशाला का शुभारंभ कार्यक्रम के मुख्यअतिथि वन्यजीव विशेषज्ञ सर्पमित्र डॉ आशीष त्रिपाठी व संस्थान के निदेशक हरि नारायण बाजपेयी ने संयुक्त रूप से किया। कार्यक्रम के मुख्यअतिथि सर्पमित्र डॉ आशीष त्रिपाठी ने अपने उध्बोधन में विभिन्न प्रशिक्षार्थियों को जल प्रबंधन व साथ जीव जंतुओं की जल में भूमिका पर विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि प्रकृति में प्रत्येक प्राणी को अपना अस्तित्व बनाए रखने के लिए जल की आवश्यकता होती है। जीव जन्तु तथा पेड़-पौधे सभी का जीवन जल की उपलब्धता पर ही निर्भर है। जल के बिना जीवन की कल्पना भी असंभव है। मानव के अविरल विकास में इसकी आवश्यकता निरंतर बनी ही रहती है। अतः यह कहना उचित होगा कि, जल ही जीवन है। चूंकि, हमारे देश मे जल का मुख्य स्रोत मानसून के द्वारा होने वाली वर्षा है। भारत वर्ष में वर्षा वर्ष के कुछ महीनों में ही होती है, इस कारण वर्षा के रूप में प्राप्त होने वाले जल के सदुपयोग की दृष्टि से समय से इसका संरक्षण भी अति आवश्यक है। जो प्रकृति में जल प्रबंधन प्रकृति और मौजूदा जैव विविधता के चक्र को बनाए रखने में मदद करता है। उन्होंने सर्प पहचान ,सर्प दंश से बचाव व प्रकृति में सर्पो की महत्वपूर्ण भूमिका विषय पर भी लोगो को जागरूक किया।

इसी क्रम में संस्थान के निदेशक हरि नारायण बाजपेयी ने कहा कि, बेहतर जल प्रबंधन देश में कृषि की बेहतरी के लिये कुशल सिंचाई पद्धतियों को विकसित करने में भी मदद करता है। देश मे जल संसाधन सीमित हैं और हमें उन्हें अगली पीढ़ी के लिये भी बचा कर रखना है तथा यह सब उचित जल प्रबंधन के अभाव में कभी संभव नहीं हो सकता। जल, मानव अस्तित्व को बनाए रखने के लिये एक प्रमुख प्राकृतिक संसाधन भी है। यह ग्रामीण व शहरी दौनो समुदायों के बेहतर स्वास्थ्य में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कार्यशाला में चंद्रसेन सिंह, रवीन्द्र चौहान, स्नेह कुमार, चंदन पोरवाल, संदीप, राम नारायण, इंदू, कमल किशोर के साथ लगभग 90 प्रशिक्षार्थियों ने प्रतिभाग किया।अंत मे संस्थान के निदेशक हरि नारायण बाजपेयी ने सभी का आभार प्रकट कर कार्यक्रम के समापन की घोषणा की।

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