पचपेड़ीया मार्ग को लेकर सत्ताधारी पार्टी के माननीय आश्वासन देकर छू मंतर हो गए,मोहल्ला वासी परेशान
-सत्ताधारी पार्टी के नेता क्रेडिट लेकर हुए गायब नेताजी के चक्कर में ठोकर खाने को मजबूर हैं बाशिंदे
सनशाइन समय बस्ती से मनीष मिश्र कि रिपोर्ट
बस्ती। जिले के माननीय नेताजी पचपेड़िया के बाशिंदों को आश्वासन देकर छू मंतर हो गए हैं, महीनों से गायब माननीय को लेकर अब लोग परेशान हैं कि आखिर वो गए कहां। इतना ही नहीं अब लोगों ने मन बना लिया है कि इस बार माननीय को छू मंतर नहीं होने देंगे। दरअसल मामला यह है कि हाईवे को जोड़ने वाला पचपेड़िया मार्ग कई वर्ष से जर्जर है, पिछले सरकार से लेकर वर्तमान सरकार तक नहीं सुधर सका पचपेडीया मार्ग, मार्ग पर बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं, जिनमें बारिश के चलते पानी भरा हुआ है। हल्की सी बारिश में भी इस मार्ग पर पानी ही पानी नजर आता है, महाविद्यालय के अलावा इस मार्ग पर सरकारी कार्यालय, अस्पताल व कई दुकानें हैं। प्रतिदिन हजारों लोगों का इस मार्ग से आना-जाना लगा रहता है, सबसे अधिक समस्या स्थानीय लोगों को होती है। क्यों कि उन्हें प्रत्येक दिन इस समस्या से दो चार होना पड़ता है।मार्ग जाम कर कई बार हुआ है आंदोलन,पचपेड़िया मार्ग बन सके इसके लिए स्थानीय लोगों ने मार्ग जाम कर कई बार आंदोलन किया है, मामला जब प्रशासन के कानों तक पहुंता था, तब वो मौके पर पहुंचकर लोगों को समझाने बुझाने का काम करते थे, मीडिया के कैमरों में आने के लिए कई बार सत्ताधारी दल के नेता मौके पर पहुंचे और लोगों को जल्द सड़क बनने का आश्वासन दिया, लेकिन मामला सिफर रहा।नगर पालिका का टेंडर हो गया निरस्त, लोगों की समस्याओं को देखते हुए नगर पालिका की ओर से मार्ग निर्माण के लिए टेंडर निकाला गया, लेकिन तकनीकी दांव पेंच के चलते इस टेंडर को निरस्त कर दिया गया, इसका नतीजा यह निकला कि अब यह सड़क माननीय की निधि से बननी है, अब इसका टेंडर समाज कल्याण करेगा।
मलतब साफ है कि अब यहां के लोगों का कल्याण समाज कल्याण के हाथों होगा।
एक सड़क का दो भाग करके टेंडर कराने की तैयारी
सूत्रों की मानें तो नियम विरुद्घ ढंग से एक सड़क का दो भाग करके टेंडर करने की तैयारी चल रही है। जिम्मेदारों की नजर अगर इस पर नहीं पड़ती, तो हो सकता है कि टेंडर कराने की तैयारी में जुटे लोग अपनी मंशा में कामयाब हो जाएं। फिलहाल नगर पालिका ने मार्ग निर्माण को लेकर अनापत्ति प्रमाण पत्र दे दिया है।
नेता जी के क्रेडिट के चक्कर में
ठोकर खाने को लोग मजबूर है पचपेड़िया मार्ग कब का बनकर तैयार हो गया होता, लेकिन नेता जी के क्रेडिट के चक्कर में यहां के बाशिंदे ठोकरे खाने को मजबूर हैं। पालिका का टेंडर निरस्त हो जाने से यह तो साफ हो गया कि क्रेडिट भी बड़ी चीज है। जिसके कब, कहां और कैसे हासिल करना है यह राजनेता भलिभांति जानते हैं।