डॉ0 रामबाबू हरित ने अनुसूचित जाति एवं जनजाति से संबंधित शिकायतो का किया समीक्षा - Sunshine samay सनशाइन समय

डॉ0 रामबाबू हरित ने अनुसूचित जाति एवं जनजाति से संबंधित शिकायतो का किया समीक्षा

 


सनशाइन समय बस्ती से मनीष मिश्रा की रिपोर्ट

बस्ती । उ0प्र0 अनुसूचित जाति एवं जनजाति आयोग के अध्यक्ष डॉ0 रामबाबू हरित ने सर्किट हाउस सभागार में जनपद के अनुसूचित जाति एवं जनजाति से संबंधित शिकायतो का अनुश्रवण/समीक्षा किया। उन्होने कहा कि प्राप्त शिकायतों का विधिपूर्ण समाधान करना ही आयोग का मुख्य उद्देश्य है। अनुसूचित जाति अथवा जनजाति के लोगों का जो भी प्रकरण हमें प्राप्त हो रहा है, निश्चित रूप से उसकी निरन्तर सुनवाई करते हुए समाधान किया जा रहा है।

उन्होने कहा कि मेरे अध्यक्ष पद का कार्यभार ग्रहण करने के उपरान्त जून 2021 से 342 मामले लम्बित थे, जिसमें पुलिस विभाग के 280, राजस्व विभाग के 40 व अन्य विभाग से संबंधित 22 मामले थे। आयोग को प्राप्त प्रार्थना पत्रों (801) में से 440 मामलों को संबंधित विभागों को निस्तारण हेतु कार्यवाही करायी गयी और 361 मामलों में आख्याए प्राप्त कर निस्तारित किया गया। उन्होने बताया कि लम्बित 06 प्रकरणों का निस्तारण कराते हुए पीड़ित परिवार को 09 लाख 75 हजार रूपये की आर्थिक सहायता आयोग के माध्यम से उपलब्ध करायी गयी। 

अनुसूचित जाति एंव जनजाति आयोग के उपाध्यक्ष रामनरेश पासवान ने कहा कि जनपद में सर्वाधित मामले लगभग 80 प्रतिशत पुलिस विभाग से संबंधित है। मामलों को निस्तारित कराने में आयोग शासन की मंशा के अनुरूप काफी सक्रिय है। दलित/पीड़ित को यदि न्याय नही मिल रहा है तो ऐसे लोग आयोग में अपनी शिकायत दें सकते है,  जो भी शिकायते प्राप्त होती है तो उन्हें गम्भीरतापूर्वक संज्ञान लेकर त्वरित निस्तारण कराया जाता है। आयोग अनुसूचित जाति एंव जनजाति के हित चिन्तन के लिए विभागीय अधिकारियों को भी निर्देशित करने के साथ ही समाचार पत्रों इलेक्ट्रानिक मीडिया/सोशल मीडिया के माध्यम से भी उत्पीड़न का संज्ञान लेकर त्वरित कार्यवाही कराता है। 

जिलाध्यक्ष महेश शुक्ल ने सम्बोधित करते हुए कहा कि शासन की मंशा है कि दलित एवं निम्न वर्ग के पीड़ित व्यक्तियों को त्वरित न्याय मिले। उन्हें समाज की मुख्य धारा से जोड़ा जाय, जो भी योजनाए संचालित है। शासन/प्रशासन के सहयोग से गरीब एवं दलित परिवारों तक पहुॅचे। इसका पूरा ध्यान सरकार द्वारा किया जा रहा है। उन्होने पुलिस विभाग के अधिकारियों को सचेत करते हुए कहा कि यह वास्तविक मूल्याकंन का विषय है कि दलित उत्पीड़न के संबंध में कानून का सही प्रयोग हो, गलत तरीके से दलित उत्पीड़न या एक्ट लगाना शासन की छवि को धूमिल करता है। हमारे प्रशासनिक अधिकारी धारा दर्ज करते समय सतर्कता बरते।

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